नई दिल्ली: नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले New Labour Code के प्रभावी होने से कर्मचारियों का Provident Fund (PF) बढ़ेगा, जबकि इन-हैंड सैलरी घट सकती है। सरकार ने इस नए लेबर कोड को पिछले साल नवंबर में नोटिफाई किया था और अब इसके लागू होने की संभावना तेज हो गई है।

नए नियमों के अनुसार, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य हो सकता है। अभी कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखकर भत्तों के माध्यम से सैलरी देती हैं, जिससे PF योगदान कम रहता है। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद बेसिक सैलरी बढ़ेगी और उसी के साथ PF और ग्रेच्युटी योगदान भी बढ़ जाएगा।
इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों की मंथली इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा। PF में ज्यादा कटौती होने के कारण कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाली रकम कम हो सकती है। हालांकि, इसका एक सकारात्मक पहलू भी है। लंबे समय में कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ेगी और वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी।
श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, नए लेबर कोड का उद्देश्य वेतन संरचना को पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा लाभ बढ़ाना है। इसके अलावा, ओवरटाइम नियम, वर्किंग ऑवर्स और छुट्टियों से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव शुरुआती दौर में कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह फायदेमंद साबित होगा। कंपनियों को भी अपनी सैलरी संरचना में बदलाव करना होगा।
1 अप्रैल से लागू होने वाले इस नए लेबर कोड पर सभी कर्मचारियों और कंपनियों की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की सैलरी पर पड़ने वाला है।