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रुपया 3 महीने के निचले स्तर पर धड़ाम! डॉलर के मुकाबले पहली बार 89.61 तक गिरा — जानें क्यों मचा है बाजार में तूफान

भारत की मुद्रा रुपया शुक्रवार को जोरदार दबाव में दिखाई दी। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में रुपया 88.67 पर खुला और तेज़ी से टूटता हुआ 89.61 के नए ऑल-टाइम लो तक पहुंच गया। दिन के अंत में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.40 पर ट्रेड करता दिखा। पिछले तीन महीनों में यह सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट है। गुरुवार को यह 20 पैसे फिसलकर 88.68 पर बंद हुआ था, यानी लगातार दूसरे दिन रुपये पर भारी प्रेशर दिखाई दिया।

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Nov 24, 2025 | 139 views
रुपया 3 महीने के निचले स्तर पर धड़ाम! डॉलर के मुकाबले पहली बार 89.61 तक गिरा — जानें क्यों मचा है बाजार में तूफान

रुपया 3 महीने के निचले स्तर पर धड़ाम! डॉलर के मुकाबले पहली बार 89.61 तक गिरा — जानें क्यों मचा है बाजार में तूफान

भारत की मुद्रा रुपया शुक्रवार को जोरदार दबाव में दिखाई दी। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में रुपया 88.67 पर खुला और तेज़ी से टूटता हुआ 89.61 के नए ऑल-टाइम लो तक पहुंच गया।
दिन के अंत में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.40 पर ट्रेड करता दिखा।

पिछले तीन महीनों में यह सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट है। गुरुवार को यह 20 पैसे फिसलकर 88.68 पर बंद हुआ था, यानी लगातार दूसरे दिन रुपये पर भारी प्रेशर दिखाई दिया।


आखिर क्या हुआ? रुपया इतनी तेजी से क्यों टूटा?

रुपये की गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू दबावों के एक साथ आने के कारण हुई।
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।


1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेज़ मजबूती

डॉलर इंडेक्स (DXY) लगातार ऊपर जा रहा है।
कारण:

  • अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के कड़े रुख के संकेत

  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल

  • मिड-ईस्ट और रूस-यूरोप भू-राजनीतिक तनाव से डॉलर में “सेफ हेवन” खरीदारी

डॉलर जितना मजबूत, उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं उतनी कमजोर — और यही रुपये के साथ हुआ।


2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज़ उछाल

ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच चुका है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए महंगा तेल —
👉 अधिक डॉलर आउटफ्लो
👉 घाटा बढ़ने का खतरा
👉 रुपये पर दबाव


3. विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली बढ़ी

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच FIIs लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं।

  • इक्विटी से बड़े पैमाने पर आउटफ्लो

  • बॉन्ड मार्केट में भी सेलिंग

  • डॉलर की मांग बढ़ी → रुपये पर असर पड़ा


4. चीन और एशियाई बाजारों में कमजोरी

भारत सहित एशिया के कई उभरते बाजार लाल निशान में रहे।
विदेशी निवेशक सामान्यतः ऐसे समय में सुरक्षित विकल्पों में जाते हैं — यानी डॉलर।


5. भारत के चालू खाते (CAD) और मुद्रास्फीति को लेकर चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के CAD के बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे रुपये को लेकर अनिश्चितता और बढ़ी।
महंगाई के कारण RBI पर भी दबाव बना हुआ है।


आज बाजार में ऐसा क्या हुआ जिसने हलचल बढ़ा दी?

✓ बैंकिंग और IT शेयरों में भारी सेलिंग
✓ डॉलर की मांग अचानक तेज़
✓ इम्पोर्टर्स ने हेजिंग बढ़ाई
✓ ट्रेडर्स ने रुपये में नई शॉर्ट पोज़िशन बनाई
✓ भू-राजनीतिक तनावों की नई रिपोर्ट्स

इन सब कारणों ने मिलकर रुपये को 89.61 तक गिरा दिया।


क्या RBI ने इंटरवेन किया?

मार्केट सूत्रों के अनुसार, RBI ने डॉलर बिकवाकर हस्तक्षेप किया —
लेकिन बहुत आक्रामक नहीं।

कारण:

  • RBI नहीं चाहता कि बाजार यह महसूस करे कि हर बार केंद्रीय बैंक सहारा देगा

  • रुपये को अपने नैचुरल लेवल पर समायोजित होने दिया जा रहा है

इसीलिए दिन के अंत में रुपये में थोड़ा रिकवरी भी दिखी और यह 89.40 पर बंद हुआ।


रुपये की गिरावट का असर आप पर कैसे पड़ेगा?

1. विदेश यात्रा और महंगी होगी

एयर टिकट, होटल, विदेशी खर्च — सब बढ़ जाएगा।

2. इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स महंगे हो सकते हैं

क्योंकि कई कंपोनेंट्स डॉलर में खरीदे जाते हैं।

3. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं

महंगा डॉलर = महंगा पेट्रोल-डीजल आयात।

4. विदेश में स्टडी और फीस महंगी

स्टूडेंट्स को ज्यादा रुपए देने होंगे।

5. NRI को फायदा

भारत पैसे भेजने पर उन्हें ज़्यादा रुपये मिलेंगे।


क्या रुपया आगे और गिरेगा? (Market Outlook)

एनालिस्ट्स के अनुसार अगले कुछ हफ्ते रुपये के लिए आसान नहीं होंगे।
संभावनाएँ:

  • अगर डॉलर इंडेक्स 108 के ऊपर चला गया, तो रुपये में और कमजोरी संभव

  • कच्चे तेल में तेजी जारी रही तो 90–90.50 तक भी दिख सकता है

  • RBI की पॉलिसी और इंटरवेनशन से अस्थायी राहत मिल सकती है

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 89.80–90.20 रुपये का अगला महत्वपूर्ण ज़ोन है।


निष्कर्ष: रुपये के लिए चुनौतीपूर्ण समय जारी

रुपया सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय माहौल से भी भारी दबाव झेल रहा है।
फेड की पॉलिसी, महंगा तेल, FII आउटफ्लो और भू-राजनीतिक तनाव — सब मिलकर रुपये को All-Time Low पर ले आए हैं।

आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।

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